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हरवर्स नजाने हमारा कितना ही अनाज सड़ता हे खुले आसमान के निचे और गोदामों में

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कुछ मुदे जनहित के
हरवर्स नजाने हमारा कितना ही अनाज सड़ता हे खुले आसमान के निचे और गोदामों में हमारे हरियाणा में गन्ने की फसल बहुत होती हे और चीनी उत्पादन भी बहुत होता हे कई जगह चीनी मिले लगायी गई हे मगर हमारे यहा ही चीनी के भाव असमान को छु रहे हे क्यों और अन्य फसलो के किसानो को सही व उचित भाव नहीं मिल पाते क्यों इस का सब से बड़ा कारण हे हनारी पैदावार का विदेस निति के तहत आयात व निर्यात हमारी सरकार हमारी जयादातर चीनी को विदेशो मे निर्यात करती हे और साथ ही हमारी रोज मरा की जरुरत के समान और हमारी फसलो पर लगा हुवा भारी भरकम टेक्स भी इस का जुमेवार हे जिस के कारन हमें चीनी कम गुणवता वाली और महगे दामो पर मिलती ही हे साथ ही अन्य जरुरत के घरेलू समान के लिए भी भारी कीमते चुकानी पड़ती हे सरकार द्वारा लगाय गय इन भारी भरकम टेक्सो के कारन बहार के वय्पारी भी नहीं आते और सारा अनाज सरकारी एजेंसियों को खरीदना पड़ता हे और पहले से ही भरे वेअरहाउसों के कारन ना तो समय पर उठान हो पाता हे और यह अनाज बहार खुले मे सटोक करना इन एजंसियो की मज़बूरी होती हे और यह जरुरत से जयादा तादात में एक्तरित किया गया अनाज वेअरहाउसों और बहार खुले पड़ा सड़ता रहता हेहमारी परदेस सरकार को इस बारे में जलद से जल्द सकारत्मक सोच को अपनाना होगा फसलो पर लगाये गये टेक्सो को हटा कर भारी वपारी वर्ग को तो हमारी मंडियों से जोड़ना ही होगा साथ ही नई फसल आने से पहले पुराने सारे सटोक को विदेस निर्यात को खोलते हुवे निर्यात करना होगा इस से पुराना अनाज भी ख़राब नहीं होगा और पुराने अनाज को बेच्च कर मिले रूपए से ही दुबरा अनाज खरीदा जा सकेगा और हर बार सरकारी खजाने खली खाली करके अनाज को खरीदने उस के रखरखाव पर नहीं लगाने पड़ेगे इस से हमे फसलो के उचित भाव भी मिल जायगे और हरवर्स की तरह हमारा अनाज इस तरह सड़ने से भी बच्च जायेगा और जयादा पुराना होने पर समुद्र की भेट भी नहीं चडेगा कयोकी अब हमारी सरकार को पुराने और दकिया नुसी इन विचारो को तयागना की अकाल के वकत या बुरे समय मे सरकार द्वारा सटोक किया गया यह अनाज काम आयेगा उस समय यह नियम बनाना समय की जरुरत था मगर आज हम एकीसवी सदी में जी रहे हे आज हमारा देस हर छेत्र मे अगर्णीय हे इस लिए इस तरह अनाज और धन का दुरपयोग नहीं होना चहिये हर बार जरुरत व सटोक करने की छमता को देखते हुवे ही अनाज सटोक किया जाय बहारी वपारियो को आमंत्रित करने के लिए अनाज पर लगाये गये टेक्स कम किये जाय हमारे अनाज का विदेसी निर्यात खोला जाय जिस से जमीदारो की फसले तो समय पर और उचीत भाव में बिक ही पायगी साथ ही सरकार की आर्थिक सिथ्ती भी सुद्रद और मजबुत हो जायगी हमारी सरकारी अजन्सियो को हरवर्स अनाज के लिए सरकारी खजाने खाली नहीं करने पड़ेगे और हर वर्स की तरह हमारा अनाज सड़ने से भी बच्च जायेगा
आप लोगो को क्या लगता हे इस बारे में अपनी राय से हमें जरुर अवगत करवाये
परदेस अधियक्स
जय भगवान सिंह कादयान
जननायक चोधरी देवीलाल ग्राम सुधार सगठन
हिसार हरियाणा

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