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आज माँ का श्राद है,,,उनको नमन करते हुवे इतना ही कहूँगा ,,,

Posted On: 2 Oct, 2013 Others में

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कहने को अनपढ़ थी पर कमाल थी
हिसाब में मेरी माँ बेमिसाल थी

आँखे पढती थी अख़बार की तरह
पूरे कुनबे की माँ देखभाल थी

मरने से पहले माँ किस्मत बना गई
बेशक खुद जीते जी फटेहाल थी

बुखार हो या दर्द सबका इलाज़ था
माँ चलता फिरता एक अस्पताल थी

भूला नही हूँ कुछ भी सब याद है
माँ के बिन जिन्दगी जी का जंजाल थी

माँ कहने को तो थी लाजवाब पर
उलझा सा सुलझा सा एक सवाल थी

दिल से मन से चाहत में बेचैन
जैसे तू यूं ही माँ भी विशाल थी

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ritu Gupta के द्वारा
October 2, 2013

सुंदर रचना

    laxmikadyan के द्वारा
    October 4, 2013

    आप का बहुत बहुत धन्यवाद


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